यूरिक एसिड का निर्माण उस समय होता है जब शरीर में प्यूरिन न्यूक्लियटाइड का निर्माण होता है जो कि ग़लत रूप से अपचय(catabolise) होती है. शरीर में यूरिक एसिड के अतिरिक्त मात्रा होने से गठिया तथा अन्य संबंधित रोग उत्पन्न हो जाते हैं. यह रोग ख़ास तौर पर पैरों के जोड़ों में उत्पन्न होता है.
यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण (Symptoms Of Increased Uric Acid In Hindi)
- गठिया
- ज्वर/ बुखार
- सूजन/ शोथ
- तीखा सुई के चुभने जैसा दर्द
- घुटनों में सूजन
- त्वचा की रंगत का बदलना
- शरीर के जोड़ों में दर्द और लालिमा
गठिया के कारण ( Causes Of Gout As Per Ayurveda In Hindi)
यह रक्त धातु और वात के कुपित हो जाने के कारण उत्पन्न होता है. गठिया को आयुर्वेद में वातरक्त भी कहा जाता है.
यह रोग खट्टे, तीखे, मसालेदार, तले हुए भोजन का अत्याधिक सेवन करने से, लाल माँस, दिन में सोने, अत्याधिक क्रोध करने से, शरीर में प्राकृतिक वेगॉन को रोकने से, अत्याधिक कामुक व्यवहार के कारण उत्पन्न हो सकता है.
यह रोग खट्टे, तीखे, मसालेदार, तले हुए भोजन का अत्याधिक सेवन करने से, लाल माँस, दिन में सोने, अत्याधिक क्रोध करने से, शरीर में प्राकृतिक वेगॉन को रोकने से, अत्याधिक कामुक व्यवहार के कारण उत्पन्न हो सकता है.
कुछ आसान घरेलू प्रयोग और परहेज़ (Simple Tips For Gout Treatment In Hindi)
यह रसायन अन्य रोगों के होने की स्थिति में भी पाय जाता है. इस रोग से निजात पाने के लिए कुछ सरल से कदम अवश्य उठाएँ:
- खूब सारा पानी पीजिए
- मीट, टोफू, मछली, सार्डीन, और अन्य प्रकार का माँस ग्रहण नही करना चाहिए.
- शतावरी, मशरूम, पालक, सोयाबीन, पनीर, मटर भी नही खाने चाहिए.
- सेब का जूस मत पीजिए.

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